पंचांग 26 नवंबर 2047
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 नवंबर 2047 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय13:49
चंद्रास्त02:22 (27 नव॰)
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1969 · विक्रम (चैत्रादि) 2104
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कुंभ 09:20 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 05:12 (27 नव॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 07:18 (28 नव॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 15:52 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 18:14 (27 नव॰) तक
- योग
- वज्र 04:49 (27 नव॰) तक, फिर सिद्धि 05:19 (28 नव॰) तक
- करण
- तैतिल 16:19 तक, फिर गर 05:12 (27 नव॰) तक, फिर वणिज 18:13 (27 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:43
- राहु काल15:08 – 16:32
- यमगंड09:34 – 10:58
- गुलिक काल12:21 – 13:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:47 – 08:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:34
- चर(सामान्य)09:34 – 10:58
- लाभ(शुभ)10:58 – 12:21
- अमृत(शुभ)12:21 – 13:45
- काल(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:08
- शुभ(शुभ)15:08 – 16:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:56
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- लाभ(शुभ)19:32 – 21:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:45
- शुभ(शुभ)22:45 – 00:21 (27 नव॰)
- अमृत(शुभ)00:21 (27 नव॰) – 01:58 (27 नव॰)
- चर(सामान्य)01:58 (27 नव॰) – 03:34 (27 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:34 (27 नव॰) – 05:11 (27 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:11 (27 नव॰) – 06:47 (27 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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