पंचांग 26 मार्च 2048

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 मार्च 2048 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय15:22
चंद्रास्त04:14 (27 मार्च)
मास:
अधिक चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क 01:09 (27 मार्च) तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 13:53 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 13:21 (27 मार्च) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 01:09 (27 मार्च) तक, फिर मघा 00:54 (28 मार्च) तक
योग
सुकर्मा 09:56 तक, फिर धृति 08:30 (27 मार्च) तक
करण
विष्टि 13:53 तक, फिर बव 01:43 (27 मार्च) तक, फिर बालव 13:21 (27 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
  • राहु काल14:11 – 15:43
  • यमगंड06:33 – 08:05
  • गुलिक काल09:36 – 11:08

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:33 – 08:05
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:05 – 09:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:36 – 11:08
  • चर(सामान्य)11:08 – 12:40
  • लाभ(शुभ)12:40 – 14:11
  • अमृत(शुभ)14:11 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • शुभ(शुभ)17:15 – 18:46

रात

  • अमृत(शुभ)18:46 – 20:15
  • चर(सामान्य)20:15 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:39 (27 मार्च)
  • लाभ(शुभ)00:39 (27 मार्च) – 02:07 (27 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:07 (27 मार्च) – 03:36 (27 मार्च)
  • शुभ(शुभ)03:36 (27 मार्च) – 05:04 (27 मार्च)
  • अमृत(शुभ)05:04 (27 मार्च) – 06:32 (27 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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