पंचांग 6 अप्रैल 2048

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 अप्रैल 2048 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय02:09 (7 अप्रैल)
चंद्रास्त12:48
मास:
अधिक चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
धनु 13:26 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 10:54 तक, फिर कृष्ण नवमी 09:41 (7 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 07:37 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 07:03 (7 अप्रैल) तक
योग
शिव 19:59 तक, फिर सिद्ध 18:01 (7 अप्रैल) तक
करण
कौलव 10:54 तक, फिर तैतिल 22:15 तक, फिर गर 09:41 (7 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:01
  • राहु काल07:57 – 09:30
  • यमगंड11:03 – 12:36
  • गुलिक काल14:10 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:24 – 07:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:30
  • शुभ(शुभ)09:30 – 11:03
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:10
  • चर(सामान्य)14:10 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:16
  • अमृत(शुभ)17:16 – 18:49

रात

  • चर(सामान्य)18:49 – 20:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:09
  • लाभ(शुभ)23:09 – 00:36 (7 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:36 (7 अप्रैल) – 02:03 (7 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)02:03 (7 अप्रैल) – 03:30 (7 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:30 (7 अप्रैल) – 04:56 (7 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:56 (7 अप्रैल) – 06:23 (7 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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