पंचांग 11 जुलाई 2048

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जुलाई 2048 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त19:23
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मिथुन 19:29 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 09:34 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 11:23 (12 जुल॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 02:05 (12 जुल॰) तक, फिर पुष्य 04:17 (13 जुल॰) तक
योग
व्याघात 15:39 तक, फिर हर्षण 16:06 (12 जुल॰) तक
करण
नाग 09:34 तक, फिर किंस्तुघ्न 22:31 तक, फिर बव 11:23 (12 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
  • राहु काल09:22 – 11:01
  • यमगंड14:18 – 15:57
  • गुलिक काल06:05 – 07:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:05 – 07:43
  • शुभ(शुभ)07:43 – 09:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:22 – 11:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:40
  • चर(सामान्य)12:40 – 14:18
  • लाभ(शुभ)14:18 – 15:57
  • अमृत(शुभ)15:57 – 17:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:15

रात

  • लाभ(शुभ)19:15 – 20:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
  • शुभ(शुभ)21:57 – 23:19
  • अमृत(शुभ)23:19 – 00:40 (12 जुल॰)
  • चर(सामान्य)00:40 (12 जुल॰) – 02:01 (12 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:01 (12 जुल॰) – 03:22 (12 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:22 (12 जुल॰) – 04:44 (12 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)04:44 (12 जुल॰) – 06:05 (12 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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