पंचांग 3 अक्टूबर 2048
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 अक्टूबर 2048 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय03:07 (4 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:13
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कर्क 04:42 (4 अक्टू॰) तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 02:23 (4 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 02:37 (5 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 04:42 (4 अक्टू॰) तक, फिर मघा 05:29 (5 अक्टू॰) तक
- योग
- सिद्ध 16:35 तक, फिर साध्य 15:56 (4 अक्टू॰) तक
- करण
- बव 13:59 तक, फिर बालव 02:23 (4 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 14:36 (4 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
- राहु काल09:24 – 10:53
- यमगंड13:52 – 15:22
- गुलिक काल06:25 – 07:54
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
- शुभ(शुभ)07:54 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:23
- चर(सामान्य)12:23 – 13:52
- लाभ(शुभ)13:52 – 15:22
- अमृत(शुभ)15:22 – 16:51
- काल(वर्जित (परंपरा))16:51 – 18:21
रात
- लाभ(शुभ)18:21 – 19:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:51 – 21:22
- शुभ(शुभ)21:22 – 22:52
- अमृत(शुभ)22:52 – 00:23 (4 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:23 (4 अक्टू॰) – 01:53 (4 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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