पंचांग 8 अक्टूबर 2048
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 अक्टूबर 2048 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय06:47
चंद्रास्त18:35
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कन्या 15:14 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 21:08 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 18:46 (9 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 02:29 (9 अक्टू॰) तक, फिर स्वाती 00:48 (10 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 07:58 तक, फिर वैधृति 05:01 (9 अक्टू॰) तक, फिर विष्कम्भ 01:54 (10 अक्टू॰) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 10:14 तक, फिर बव 21:08 तक, फिर बालव 07:59 (9 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
- राहु काल13:50 – 15:19
- यमगंड06:26 – 07:55
- गुलिक काल09:24 – 10:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:26 – 07:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- चर(सामान्य)10:53 – 12:21
- लाभ(शुभ)12:21 – 13:50
- अमृत(शुभ)13:50 – 15:19
- काल(वर्जित (परंपरा))15:19 – 16:48
- शुभ(शुभ)16:48 – 18:16
रात
- अमृत(शुभ)18:16 – 19:48
- चर(सामान्य)19:48 – 21:19
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:19 – 22:50
- काल(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:21 (9 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)00:21 (9 अक्टू॰) – 01:53 (9 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:53 (9 अक्टू॰) – 03:24 (9 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)03:24 (9 अक्टू॰) – 04:55 (9 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)04:55 (9 अक्टू॰) – 06:26 (9 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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