पंचांग 16 अक्टूबर 2048
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 अक्टूबर 2048 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:11
चंद्रोदय14:23
चंद्रास्त02:18 (17 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर 02:30 (17 अक्टू॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 01:48 (17 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 00:41 (18 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 14:49 तक, फिर धनिष्ठा 14:15 (17 अक्टू॰) तक
- योग
- शूल 03:06 (17 अक्टू॰) तक, फिर गण्ड 01:04 (18 अक्टू॰) तक
- करण
- तैतिल 14:29 तक, फिर गर 01:48 (17 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 13:12 (17 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:43
- राहु काल10:52 – 12:19
- यमगंड15:15 – 16:43
- गुलिक काल07:56 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:28 – 07:56
- लाभ(शुभ)07:56 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:52
- काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:19
- शुभ(शुभ)12:19 – 13:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:43
- चर(सामान्य)16:43 – 18:11
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:11 – 19:43
- काल(वर्जित (परंपरा))19:43 – 21:15
- लाभ(शुभ)21:15 – 22:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:47 – 00:20 (17 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:20 (17 अक्टू॰) – 01:52 (17 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:52 (17 अक्टू॰) – 03:24 (17 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (17 अक्टू॰) – 04:56 (17 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:56 (17 अक्टू॰) – 06:29 (17 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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