पंचांग 19 अक्टूबर 2048

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 अक्टूबर 2048 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय16:23
चंद्रास्त05:01 (20 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कुंभ 07:59 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 23:27 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 23:26 (20 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 14:02 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 14:30 (20 अक्टू॰) तक
योग
ध्रुव 21:48 तक, फिर व्याघात 20:38 (20 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 11:37 तक, फिर तैतिल 23:27 तक, फिर गर 11:23 (20 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
  • राहु काल07:57 – 09:24
  • यमगंड10:51 – 12:19
  • गुलिक काल13:46 – 15:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:29 – 07:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
  • शुभ(शुभ)09:24 – 10:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:46
  • चर(सामान्य)13:46 – 15:14
  • लाभ(शुभ)15:14 – 16:41
  • अमृत(शुभ)16:41 – 18:08

रात

  • चर(सामान्य)18:08 – 19:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:41 – 21:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:14 – 22:46
  • लाभ(शुभ)22:46 – 00:19 (20 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:19 (20 अक्टू॰) – 01:52 (20 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)01:52 (20 अक्टू॰) – 03:24 (20 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)03:24 (20 अक्टू॰) – 04:57 (20 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)04:57 (20 अक्टू॰) – 06:29 (20 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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