पंचांग 6 दिसंबर 2048
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 दिसंबर 2048 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:53
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय07:25
चंद्रास्त18:48
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 13:25 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 17:22 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 13:46 (7 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 13:25 तक, फिर मूल 10:33 (7 दिस॰) तक
- योग
- धृति 07:59 तक, फिर शूल 03:46 (7 दिस॰) तक, फिर गण्ड 23:39 (7 दिस॰) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 07:11 तक, फिर बव 17:22 तक, फिर बालव 03:33 (7 दिस॰) तक, फिर कौलव 13:46 (7 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:47
- राहु काल16:34 – 17:57
- यमगंड12:25 – 13:48
- गुलिक काल15:11 – 16:34
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:53 – 08:16
- चर(सामान्य)08:16 – 09:39
- लाभ(शुभ)09:39 – 11:02
- अमृत(शुभ)11:02 – 12:25
- काल(वर्जित (परंपरा))12:25 – 13:48
- शुभ(शुभ)13:48 – 15:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:34 – 17:57
रात
- शुभ(शुभ)17:57 – 19:34
- अमृत(शुभ)19:34 – 21:11
- चर(सामान्य)21:11 – 22:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:48 – 00:25 (7 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:25 (7 दिस॰) – 02:03 (7 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:03 (7 दिस॰) – 03:40 (7 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:40 (7 दिस॰) – 05:17 (7 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:17 (7 दिस॰) – 06:54 (7 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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