पंचांग 22 दिसंबर 2048
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 दिसंबर 2048 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय19:54
चंद्रास्त08:23
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मिथुन 15:57 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 17:30 तक, फिर कृष्ण तृतीया 20:00 (23 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 22:42 तक, फिर पुष्य 01:34 (24 दिस॰) तक
- योग
- ब्रह्म 09:39 तक, फिर इन्द्र 10:30 (23 दिस॰) तक
- करण
- गर 17:30 तक, फिर वणिज 06:46 (23 दिस॰) तक, फिर विष्टि 20:00 (23 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:55
- राहु काल15:18 – 16:41
- यमगंड09:47 – 11:10
- गुलिक काल12:33 – 13:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:25 – 09:47
- चर(सामान्य)09:47 – 11:10
- लाभ(शुभ)11:10 – 12:33
- अमृत(शुभ)12:33 – 13:55
- काल(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:18
- शुभ(शुभ)15:18 – 16:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:41 – 18:03
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:03 – 19:41
- लाभ(शुभ)19:41 – 21:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:56
- शुभ(शुभ)22:56 – 00:33 (23 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:33 (23 दिस॰) – 02:10 (23 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:10 (23 दिस॰) – 03:48 (23 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:48 (23 दिस॰) – 05:25 (23 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:25 (23 दिस॰) – 07:03 (23 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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