पंचांग 2 जनवरी 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 जनवरी 2049 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय06:05 (3 जन॰)
चंद्रास्त16:23
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक 00:59 (3 जन॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 15:15 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 11:39 (3 जन॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:59 (3 जन॰) तक, फिर मूल 22:02 (3 जन॰) तक
योग
गण्ड 17:36 तक, फिर वृद्धि 13:23 (3 जन॰) तक
करण
वणिज 15:15 तक, फिर विष्टि 01:29 (3 जन॰) तक, फिर शकुनि 11:39 (3 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:00
  • राहु काल09:52 – 11:15
  • यमगंड14:01 – 15:24
  • गुलिक काल07:07 – 08:30

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:30
  • शुभ(शुभ)08:30 – 09:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:52 – 11:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:15 – 12:38
  • चर(सामान्य)12:38 – 14:01
  • लाभ(शुभ)14:01 – 15:24
  • अमृत(शुभ)15:24 – 16:47
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:10

रात

  • लाभ(शुभ)18:10 – 19:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:47 – 21:24
  • शुभ(शुभ)21:24 – 23:01
  • अमृत(शुभ)23:01 – 00:38 (3 जन॰)
  • चर(सामान्य)00:38 (3 जन॰) – 02:15 (3 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:15 (3 जन॰) – 03:53 (3 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:53 (3 जन॰) – 05:30 (3 जन॰)
  • लाभ(शुभ)05:30 (3 जन॰) – 07:07 (3 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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