पंचांग 31 जनवरी 2049
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 जनवरी 2049 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय05:43 (1 फ़र॰)
चंद्रास्त16:13
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 01:47 (1 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 22:16 (1 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- मूल 08:57 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 06:17 (1 फ़र॰) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 03:29 (2 फ़र॰) तक
- योग
- हर्षण 18:15 तक, फिर वज्र 14:11 (1 फ़र॰) तक
- करण
- गर 15:29 तक, फिर वणिज 01:47 (1 फ़र॰) तक, फिर विष्टि 12:02 (1 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:10
- राहु काल17:02 – 18:27
- यमगंड12:48 – 14:13
- गुलिक काल15:37 – 17:02
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:08 – 08:33
- चर(सामान्य)08:33 – 09:58
- लाभ(शुभ)09:58 – 11:23
- अमृत(शुभ)11:23 – 12:48
- काल(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:13
- शुभ(शुभ)14:13 – 15:37
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:37 – 17:02
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:02 – 18:27
रात
- शुभ(शुभ)18:27 – 20:02
- अमृत(शुभ)20:02 – 21:37
- चर(सामान्य)21:37 – 23:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:47 (1 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:47 (1 फ़र॰) – 02:22 (1 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)02:22 (1 फ़र॰) – 03:57 (1 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:57 (1 फ़र॰) – 05:32 (1 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)05:32 (1 फ़र॰) – 07:07 (1 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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