पंचांग 21 मार्च 2049
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 मार्च 2049 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:37
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय20:31
चंद्रास्त07:30
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1970 · विक्रम (चैत्रादि) 2105
- संवत्सर:
- विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कन्या 15:38 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 16:57 तक, फिर कृष्ण तृतीया 15:58 (22 मार्च) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 03:32 (22 मार्च) तक, फिर स्वाती 03:05 (23 मार्च) तक
- योग
- ध्रुव 21:10 तक, फिर व्याघात 19:11 (22 मार्च) तक
- करण
- गर 16:57 तक, फिर वणिज 04:29 (22 मार्च) तक, फिर विष्टि 15:58 (22 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:06
- राहु काल17:14 – 18:45
- यमगंड12:41 – 14:12
- गुलिक काल15:43 – 17:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:37 – 08:08
- चर(सामान्य)08:08 – 09:39
- लाभ(शुभ)09:39 – 11:10
- अमृत(शुभ)11:10 – 12:41
- काल(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
- शुभ(शुभ)14:12 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:45
रात
- शुभ(शुभ)18:45 – 20:14
- अमृत(शुभ)20:14 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:41 (22 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:41 (22 मार्च) – 02:10 (22 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:10 (22 मार्च) – 03:39 (22 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:39 (22 मार्च) – 05:08 (22 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:08 (22 मार्च) – 06:36 (22 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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