पंचांग 4 अप्रैल 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 अप्रैल 2049 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय07:26
चंद्रास्त20:38
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 15:51 तक, फिर शुक्ल तृतीया 16:13 (5 अप्रैल) तक
नक्षत्र
अश्विनी 13:38 तक, फिर भरणी 14:34 (5 अप्रैल) तक
योग
वैधृति 07:11 तक, फिर विष्कम्भ 06:09 (5 अप्रैल) तक, फिर प्रीति 05:40 (6 अप्रैल) तक
करण
कौलव 15:51 तक, फिर तैतिल 03:57 (5 अप्रैल) तक, फिर गर 16:13 (5 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
  • राहु काल17:16 – 18:48
  • यमगंड12:37 – 14:10
  • गुलिक काल15:43 – 17:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:59
  • चर(सामान्य)07:59 – 09:31
  • लाभ(शुभ)09:31 – 11:04
  • अमृत(शुभ)11:04 – 12:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:10
  • शुभ(शुभ)14:10 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:48

रात

  • शुभ(शुभ)18:48 – 20:16
  • अमृत(शुभ)20:16 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:37 (5 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (5 अप्रैल) – 02:04 (5 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)02:04 (5 अप्रैल) – 03:31 (5 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:31 (5 अप्रैल) – 04:58 (5 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)04:58 (5 अप्रैल) – 06:25 (5 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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