पंचांग 27 अप्रैल 2049
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 अप्रैल 2049 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:09
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय03:15 (28 अप्रैल)
चंद्रास्त14:45
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
- संवत्सर:
- शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 09:50 तक, फिर कृष्ण एकादशी 08:16 (28 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 22:18 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 21:38 (28 अप्रैल) तक
- योग
- ब्रह्म 22:20 तक, फिर इन्द्र 20:07 (28 अप्रैल) तक
- करण
- विष्टि 09:50 तक, फिर बव 21:01 तक, फिर बालव 08:16 (28 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57
- राहु काल15:43 – 17:19
- यमगंड09:20 – 10:56
- गुलिक काल12:32 – 14:07
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:09 – 07:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:45 – 09:20
- चर(सामान्य)09:20 – 10:56
- लाभ(शुभ)10:56 – 12:32
- अमृत(शुभ)12:32 – 14:07
- काल(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:19
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:19 – 18:55
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:55 – 20:19
- लाभ(शुभ)20:19 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
- शुभ(शुभ)23:07 – 00:31 (28 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)00:31 (28 अप्रैल) – 01:56 (28 अप्रैल)
- चर(सामान्य)01:56 (28 अप्रैल) – 03:20 (28 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:20 (28 अप्रैल) – 04:44 (28 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:44 (28 अप्रैल) – 06:08 (28 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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