पंचांग 19 मई 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 मई 2049 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय21:10
चंद्रास्त07:33
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
वृश्चिक 14:05 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 11:03 तक, फिर कृष्ण तृतीया 08:02 (20 मई) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 14:05 तक, फिर मूल 11:52 (20 मई) तक
योग
सिद्ध 22:53 तक, फिर साध्य 19:19 (20 मई) तक
करण
गर 11:03 तक, फिर वणिज 21:33 तक, फिर विष्टि 08:02 (20 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:09
  • यमगंड07:37 – 09:15
  • गुलिक काल10:53 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)05:59 – 07:37
  • अमृत(शुभ)07:37 – 09:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:15 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:46
  • चर(सामान्य)15:46 – 17:24
  • लाभ(शुभ)17:24 – 19:02

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:02 – 20:24
  • शुभ(शुभ)20:24 – 21:46
  • अमृत(शुभ)21:46 – 23:08
  • चर(सामान्य)23:08 – 00:31 (20 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (20 मई) – 01:53 (20 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (20 मई) – 03:15 (20 मई)
  • लाभ(शुभ)03:15 (20 मई) – 04:37 (20 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:37 (20 मई) – 05:59 (20 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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