पंचांग 23 जुलाई 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 जुलाई 2049 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय01:29 (24 जुल॰)
चंद्रास्त14:00
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मेष 23:50 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण नवमी 12:56 तक, फिर कृष्ण दशमी 14:13 (24 जुल॰) तक
नक्षत्र
भरणी 17:23 तक, फिर कृत्तिका 19:25 (24 जुल॰) तक
योग
शूल 11:40 तक, फिर गण्ड 11:41 (24 जुल॰) तक
करण
गर 12:56 तक, फिर वणिज 01:30 (24 जुल॰) तक, फिर विष्टि 14:13 (24 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
  • राहु काल11:03 – 12:41
  • यमगंड15:56 – 17:34
  • गुलिक काल07:47 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:09 – 07:47
  • लाभ(शुभ)07:47 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 11:03
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:41
  • शुभ(शुभ)12:41 – 14:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:56 – 17:34
  • चर(सामान्य)17:34 – 19:12

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:34 – 21:56
  • लाभ(शुभ)21:56 – 23:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:41 (24 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)00:41 (24 जुल॰) – 02:03 (24 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)02:03 (24 जुल॰) – 03:25 (24 जुल॰)
  • चर(सामान्य)03:25 (24 जुल॰) – 04:47 (24 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:47 (24 जुल॰) – 06:09 (24 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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