पंचांग 1 सितंबर 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 सितंबर 2049 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय09:20
चंद्रास्त21:08
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कन्या 15:38 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 21:30 तक, फिर शुक्ल पंचमी 21:41 (2 सित॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 04:10 (2 सित॰) तक, फिर स्वाती 04:54 (3 सित॰) तक
योग
शुक्ल 00:36 (2 सित॰) तक, फिर ब्रह्म 23:41 (2 सित॰) तक
करण
वणिज 09:14 तक, फिर विष्टि 21:30 तक, फिर बव 09:39 (2 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:34 – 14:07
  • यमगंड07:53 – 09:27
  • गुलिक काल11:00 – 12:34

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:20 – 07:53
  • अमृत(शुभ)07:53 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:00
  • शुभ(शुभ)11:00 – 12:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:41
  • चर(सामान्य)15:41 – 17:15
  • लाभ(शुभ)17:15 – 18:48

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:48 – 20:15
  • शुभ(शुभ)20:15 – 21:41
  • अमृत(शुभ)21:41 – 23:08
  • चर(सामान्य)23:08 – 00:34 (2 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:34 (2 सित॰) – 02:00 (2 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (2 सित॰) – 03:27 (2 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (2 सित॰) – 04:53 (2 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (2 सित॰) – 06:20 (2 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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