पंचांग 9 अक्टूबर 2049
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 अक्टूबर 2049 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय16:51
चंद्रास्त05:25 (10 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
- संवत्सर:
- शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कुंभ 16:36 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 13:08 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 10:36 (10 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 22:09 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 20:28 (10 अक्टू॰) तक
- योग
- वृद्धि 23:47 तक, फिर ध्रुव 20:42 (10 अक्टू॰) तक
- करण
- तैतिल 13:08 तक, फिर गर 23:50 तक, फिर वणिज 10:36 (10 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:45
- राहु काल09:24 – 10:52
- यमगंड13:50 – 15:19
- गुलिक काल06:26 – 07:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
- शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:21
- चर(सामान्य)12:21 – 13:50
- लाभ(शुभ)13:50 – 15:19
- अमृत(शुभ)15:19 – 16:47
- काल(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:16
रात
- लाभ(शुभ)18:16 – 19:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:47 – 21:19
- शुभ(शुभ)21:19 – 22:50
- अमृत(शुभ)22:50 – 00:21 (10 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:21 (10 अक्टू॰) – 01:53 (10 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (10 अक्टू॰) – 03:24 (10 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (10 अक्टू॰) – 04:55 (10 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:55 (10 अक्टू॰) – 06:27 (10 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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