पंचांग 12 अक्टूबर 2049

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 अक्टूबर 2049 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय19:07
चंद्रास्त07:23
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 06:38 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 05:29 (13 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 05:03 (14 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 18:27 तक, फिर भरणी 18:21 (13 अक्टू॰) तक
योग
हर्षण 15:34 तक, फिर वज्र 13:43 (13 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 06:38 तक, फिर तैतिल 17:59 तक, फिर गर 05:29 (13 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 17:11 (13 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल15:17 – 16:45
  • यमगंड09:24 – 10:52
  • गुलिक काल12:20 – 13:49

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:52
  • लाभ(शुभ)10:52 – 12:20
  • अमृत(शुभ)12:20 – 13:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:17
  • शुभ(शुभ)15:17 – 16:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:14

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:14 – 19:45
  • लाभ(शुभ)19:45 – 21:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:49
  • शुभ(शुभ)22:49 – 00:20 (13 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:20 (13 अक्टू॰) – 01:52 (13 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:52 (13 अक्टू॰) – 03:24 (13 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (13 अक्टू॰) – 04:56 (13 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:56 (13 अक्टू॰) – 06:27 (13 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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