पंचांग 24 जनवरी 2050
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 जनवरी 2050 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय07:47
चंद्रास्त19:46
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1971 · विक्रम (चैत्रादि) 2106
- संवत्सर:
- शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- मकर 19:41 तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 02:48 (25 जन॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 23:15 (25 जन॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 09:13 तक, फिर धनिष्ठा 06:12 (25 जन॰) तक, फिर शतभिषा 03:27 (26 जन॰) तक
- योग
- सिद्धि 09:33 तक, फिर व्यतीपात 05:13 (25 जन॰) तक, फिर वरीयान 01:06 (26 जन॰) तक
- करण
- बालव 16:41 तक, फिर कौलव 02:48 (25 जन॰) तक, फिर तैतिल 12:59 (25 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:09
- राहु काल08:33 – 09:58
- यमगंड11:22 – 12:46
- गुलिक काल14:10 – 15:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)07:09 – 08:33
- काल(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:58
- शुभ(शुभ)09:58 – 11:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:22 – 12:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:10
- चर(सामान्य)14:10 – 15:35
- लाभ(शुभ)15:35 – 16:59
- अमृत(शुभ)16:59 – 18:23
रात
- चर(सामान्य)18:23 – 19:59
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:59 – 21:35
- काल(वर्जित (परंपरा))21:35 – 23:10
- लाभ(शुभ)23:10 – 00:46 (25 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:46 (25 जन॰) – 02:22 (25 जन॰)
- शुभ(शुभ)02:22 (25 जन॰) – 03:57 (25 जन॰)
- अमृत(शुभ)03:57 (25 जन॰) – 05:33 (25 जन॰)
- चर(सामान्य)05:33 (25 जन॰) – 07:09 (25 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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