पंचांग 16 अप्रैल 2050
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 अप्रैल 2050 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:51
चंद्रोदय02:48 (17 अप्रैल)
चंद्रास्त13:54
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मकर 01:38 (17 अप्रैल) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 08:37 तक, फिर कृष्ण दशमी 06:00 (17 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण एकादशी 03:11 (18 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 14:33 तक, फिर धनिष्ठा 12:39 (17 अप्रैल) तक
- योग
- साध्य 11:25 तक, फिर शुभ 08:08 (17 अप्रैल) तक
- करण
- गर 08:37 तक, फिर वणिज 19:21 तक, फिर विष्टि 06:00 (17 अप्रैल) तक, फिर बव 16:37 (17 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
- राहु काल09:25 – 11:00
- यमगंड14:08 – 15:43
- गुलिक काल06:17 – 07:51
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:51
- शुभ(शुभ)07:51 – 09:25
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:34
- चर(सामान्य)12:34 – 14:08
- लाभ(शुभ)14:08 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:17
- काल(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:51
रात
- लाभ(शुभ)18:51 – 20:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:17 – 21:42
- शुभ(शुभ)21:42 – 23:08
- अमृत(शुभ)23:08 – 00:34 (17 अप्रैल)
- चर(सामान्य)00:34 (17 अप्रैल) – 01:59 (17 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:59 (17 अप्रैल) – 03:25 (17 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (17 अप्रैल) – 04:50 (17 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)04:50 (17 अप्रैल) – 06:16 (17 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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