पंचांग 14 जुलाई 2050

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 जुलाई 2050 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:06
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय02:53 (15 जुल॰)
चंद्रास्त15:22
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
संवत्सर:
प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:03 (15 जुल॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 00:09 (16 जुल॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 00:07 (15 जुल॰) तक, फिर रोहिणी 00:55 (16 जुल॰) तक
योग
शूल 10:30 तक, फिर गण्ड 09:22 (15 जुल॰) तक
करण
बव 12:10 तक, फिर बालव 00:03 (15 जुल॰) तक, फिर कौलव 12:03 (15 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल14:19 – 15:57
  • यमगंड06:06 – 07:44
  • गुलिक काल09:23 – 11:01

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:06 – 07:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:23 – 11:01
  • चर(सामान्य)11:01 – 12:40
  • लाभ(शुभ)12:40 – 14:19
  • अमृत(शुभ)14:19 – 15:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
  • शुभ(शुभ)17:36 – 19:14

रात

  • अमृत(शुभ)19:14 – 20:36
  • चर(सामान्य)20:36 – 21:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:40 (15 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)00:40 (15 जुल॰) – 02:02 (15 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:02 (15 जुल॰) – 03:23 (15 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)03:23 (15 जुल॰) – 04:45 (15 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)04:45 (15 जुल॰) – 06:06 (15 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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