पंचांग 1 अगस्त 2050
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 अगस्त 2050 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:12
सूर्यास्त19:09
चंद्रोदय17:31
चंद्रास्त05:09 (2 अग॰)
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- धनु 05:29 (2 अग॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 14:24 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 11:19 (2 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 00:04 (2 अग॰) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 21:35 (2 अग॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 02:22 (2 अग॰) तक, फिर प्रीति 22:34 (2 अग॰) तक
- करण
- तैतिल 14:24 तक, फिर गर 00:55 (2 अग॰) तक, फिर वणिज 11:19 (2 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
- राहु काल07:49 – 09:26
- यमगंड11:03 – 12:40
- गुलिक काल14:18 – 15:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:12 – 07:49
- काल(वर्जित (परंपरा))07:49 – 09:26
- शुभ(शुभ)09:26 – 11:03
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:40
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
- चर(सामान्य)14:18 – 15:55
- लाभ(शुभ)15:55 – 17:32
- अमृत(शुभ)17:32 – 19:09
रात
- चर(सामान्य)19:09 – 20:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:32 – 21:55
- काल(वर्जित (परंपरा))21:55 – 23:18
- लाभ(शुभ)23:18 – 00:41 (2 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:41 (2 अग॰) – 02:03 (2 अग॰)
- शुभ(शुभ)02:03 (2 अग॰) – 03:26 (2 अग॰)
- अमृत(शुभ)03:26 (2 अग॰) – 04:49 (2 अग॰)
- चर(सामान्य)04:49 (2 अग॰) – 06:12 (2 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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