पंचांग 14 अगस्त 2050

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 अगस्त 2050 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय04:18 (15 अग॰)
चंद्रास्त16:43
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
संवत्सर:
प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन 05:07 (15 अग॰) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 11:44 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 13:17 (15 अग॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 09:33 तक, फिर पुनर्वसु 11:41 (15 अग॰) तक
योग
वज्र 14:55 तक, फिर सिद्धि 15:12 (15 अग॰) तक
करण
तैतिल 11:44 तक, फिर गर 00:28 (15 अग॰) तक, फिर वणिज 13:17 (15 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
  • राहु काल17:26 – 19:02
  • यमगंड12:39 – 14:14
  • गुलिक काल15:50 – 17:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:51
  • चर(सामान्य)07:51 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:03
  • अमृत(शुभ)11:03 – 12:39
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:14
  • शुभ(शुभ)14:14 – 15:50
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:50 – 17:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:26 – 19:02

रात

  • शुभ(शुभ)19:02 – 20:26
  • अमृत(शुभ)20:26 – 21:50
  • चर(सामान्य)21:50 – 23:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:39 (15 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (15 अग॰) – 02:03 (15 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:03 (15 अग॰) – 03:27 (15 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (15 अग॰) – 04:52 (15 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:52 (15 अग॰) – 06:16 (15 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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