पंचांग 28 अगस्त 2050
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 अगस्त 2050 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय15:16
चंद्रास्त02:49 (29 अग॰)
- मास:
- अधिक भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 06:49 तक, फिर शुक्ल एकादशी 04:45 (29 अग॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 01:58 (30 अग॰) तक
- नक्षत्र
- मूल 11:52 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 10:23 (29 अग॰) तक
- योग
- प्रीति 16:14 तक, फिर आयुष्मान 13:12 (29 अग॰) तक
- करण
- गर 06:49 तक, फिर वणिज 17:53 तक, फिर विष्टि 04:45 (29 अग॰) तक, फिर बव 15:26 (29 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
- राहु काल17:18 – 18:52
- यमगंड12:35 – 14:09
- गुलिक काल15:43 – 17:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
- चर(सामान्य)07:53 – 09:27
- लाभ(शुभ)09:27 – 11:01
- अमृत(शुभ)11:01 – 12:35
- काल(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:09
- शुभ(शुभ)14:09 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:52
रात
- शुभ(शुभ)18:52 – 20:18
- अमृत(शुभ)20:18 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:09
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:35 (29 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:35 (29 अग॰) – 02:01 (29 अग॰)
- लाभ(शुभ)02:01 (29 अग॰) – 03:27 (29 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (29 अग॰) – 04:53 (29 अग॰)
- शुभ(शुभ)04:53 (29 अग॰) – 06:19 (29 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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