पंचांग 9 अक्टूबर 2050

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 अक्टूबर 2050 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय01:51 (10 अक्टू॰)
चंद्रास्त14:05
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
संवत्सर:
प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 12:10 तक, फिर कृष्ण दशमी 14:15 (10 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 02:12 (10 अक्टू॰) तक, फिर आश्लेषा 04:58 (11 अक्टू॰) तक
योग
सिद्ध 04:19 (10 अक्टू॰) तक, फिर साध्य 05:03 (11 अक्टू॰) तक
करण
गर 12:10 तक, फिर वणिज 01:09 (10 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 14:15 (10 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
  • राहु काल16:47 – 18:16
  • यमगंड12:21 – 13:50
  • गुलिक काल15:19 – 16:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
  • चर(सामान्य)07:55 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:52
  • अमृत(शुभ)10:52 – 12:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
  • शुभ(शुभ)13:50 – 15:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:19 – 16:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:16

रात

  • शुभ(शुभ)18:16 – 19:47
  • अमृत(शुभ)19:47 – 21:19
  • चर(सामान्य)21:19 – 22:50
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:21 (10 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:21 (10 अक्टू॰) – 01:53 (10 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:53 (10 अक्टू॰) – 03:24 (10 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (10 अक्टू॰) – 04:55 (10 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:55 (10 अक्टू॰) – 06:27 (10 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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