पंचांग 21 अक्टूबर 2050
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अक्टूबर 2050 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय11:01
चंद्रास्त22:31
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल पंचमी 07:42 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 07:19 (22 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मूल 01:58 (22 अक्टू॰) तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 01:48 (23 अक्टू॰) तक
- योग
- शोभन 07:46 तक, फिर अतिगण्ड 06:19 (22 अक्टू॰) तक, फिर सुकर्मा 04:26 (23 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 07:42 तक, फिर कौलव 19:35 तक, फिर तैतिल 07:19 (22 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल10:51 – 12:19
- यमगंड15:13 – 16:40
- गुलिक काल07:57 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:30 – 07:57
- लाभ(शुभ)07:57 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:51
- काल(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
- शुभ(शुभ)12:19 – 13:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:13 – 16:40
- चर(सामान्य)16:40 – 18:07
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:07 – 19:40
- काल(वर्जित (परंपरा))19:40 – 21:13
- लाभ(शुभ)21:13 – 22:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:46 – 00:19 (22 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:19 (22 अक्टू॰) – 01:52 (22 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:52 (22 अक्टू॰) – 03:24 (22 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (22 अक्टू॰) – 04:57 (22 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:57 (22 अक्टू॰) – 06:30 (22 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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