पंचांग 25 जनवरी 2051

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 जनवरी 2051 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:24
चंद्रोदय17:11
चंद्रास्त06:23 (26 जन॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
संवत्सर:
प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
मिथुन 03:30 (26 जन॰) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 02:05 (26 जन॰) तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 02:49 (27 जन॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 08:47 तक, फिर पुनर्वसु 09:47 (26 जन॰) तक
योग
वैधृति 07:54 तक, फिर विष्कम्भ 07:03 (26 जन॰) तक, फिर प्रीति 06:30 (27 जन॰) तक
करण
गर 13:52 तक, फिर वणिज 02:05 (26 जन॰) तक, फिर विष्टि 14:24 (26 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:09परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:46 – 14:11
  • यमगंड08:33 – 09:58
  • गुलिक काल11:22 – 12:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
  • अमृत(शुभ)08:33 – 09:58
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:58 – 11:22
  • शुभ(शुभ)11:22 – 12:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:35
  • चर(सामान्य)15:35 – 16:59
  • लाभ(शुभ)16:59 – 18:24

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:24 – 19:59
  • शुभ(शुभ)19:59 – 21:35
  • अमृत(शुभ)21:35 – 23:11
  • चर(सामान्य)23:11 – 00:46 (26 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:46 (26 जन॰) – 02:22 (26 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (26 जन॰) – 03:58 (26 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:58 (26 जन॰) – 05:33 (26 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (26 जन॰) – 07:09 (26 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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