पंचांग 1 मार्च 2051
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 मार्च 2051 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:53
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय21:43
चंद्रास्त08:54
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1972 · विक्रम (चैत्रादि) 2107
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कन्या 20:42 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 06:30 (2 मार्च) तक, फिर कृष्ण पंचमी 09:02 (3 मार्च) तक
- नक्षत्र
- हस्त 07:08 तक, फिर चित्रा 10:15 (2 मार्च) तक
- योग
- गण्ड 14:56 तक, फिर वृद्धि 15:55 (2 मार्च) तक
- करण
- बव 17:10 तक, फिर बालव 06:30 (2 मार्च) तक, फिर कौलव 19:48 (2 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:46 – 14:15
- यमगंड08:22 – 09:50
- गुलिक काल11:18 – 12:46
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:53 – 08:22
- अमृत(शुभ)08:22 – 09:50
- काल(वर्जित (परंपरा))09:50 – 11:18
- शुभ(शुभ)11:18 – 12:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:11
- लाभ(शुभ)17:11 – 18:40
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:40 – 20:11
- शुभ(शुभ)20:11 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:15
- चर(सामान्य)23:15 – 00:46 (2 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:46 (2 मार्च) – 02:18 (2 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:18 (2 मार्च) – 03:49 (2 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:49 (2 मार्च) – 05:21 (2 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:21 (2 मार्च) – 06:52 (2 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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