पंचांग 6 मई 2051

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 मई 2051 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:04
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय03:19 (7 मई)
चंद्रास्त14:52
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1973 · विक्रम (चैत्रादि) 2108
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
कुंभ 22:55 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 08:00 तक, फिर कृष्ण एकादशी 05:12 (7 मई) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 02:04 (8 मई) तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:23 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 04:23 (7 मई) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 02:03 (8 मई) तक
योग
इन्द्र 15:19 तक, फिर वैधृति 11:50 (7 मई) तक
करण
विष्टि 08:00 तक, फिर बव 18:39 तक, फिर बालव 05:12 (7 मई) तक, फिर कौलव 15:40 (7 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57
  • राहु काल09:18 – 10:54
  • यमगंड14:07 – 15:44
  • गुलिक काल06:04 – 07:41

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:04 – 07:41
  • शुभ(शुभ)07:41 – 09:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:31
  • चर(सामान्य)12:31 – 14:07
  • लाभ(शुभ)14:07 – 15:44
  • अमृत(शुभ)15:44 – 17:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:21 – 18:57

रात

  • लाभ(शुभ)18:57 – 20:21
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:21 – 21:44
  • शुभ(शुभ)21:44 – 23:07
  • अमृत(शुभ)23:07 – 00:31 (7 मई)
  • चर(सामान्य)00:31 (7 मई) – 01:54 (7 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:54 (7 मई) – 03:17 (7 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:17 (7 मई) – 04:41 (7 मई)
  • लाभ(शुभ)04:41 (7 मई) – 06:04 (7 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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