पंचांग 2 जून 2051

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 जून 2051 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:07
चंद्रोदय01:15 (3 जून)
चंद्रास्त12:44
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1973 · विक्रम (चैत्रादि) 2108
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
कुंभ 05:56 (3 जून) तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 18:45 तक, फिर कृष्ण नवमी 16:33 (3 जून) तक
नक्षत्र
शतभिषा 12:56 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 11:34 (3 जून) तक
योग
विष्कम्भ 22:45 तक, फिर प्रीति 19:51 (3 जून) तक
करण
बालव 07:45 तक, फिर कौलव 18:45 तक, फिर तैतिल 05:41 (3 जून) तक, फिर गर 16:33 (3 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:58
  • राहु काल10:53 – 12:32
  • यमगंड15:50 – 17:29
  • गुलिक काल07:36 – 09:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)05:57 – 07:36
  • लाभ(शुभ)07:36 – 09:15
  • अमृत(शुभ)09:15 – 10:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:32
  • शुभ(शुभ)12:32 – 14:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:50 – 17:29
  • चर(सामान्य)17:29 – 19:07

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:07 – 20:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:29 – 21:50
  • लाभ(शुभ)21:50 – 23:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:32 (3 जून)
  • शुभ(शुभ)00:32 (3 जून) – 01:53 (3 जून)
  • अमृत(शुभ)01:53 (3 जून) – 03:14 (3 जून)
  • चर(सामान्य)03:14 (3 जून) – 04:36 (3 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:36 (3 जून) – 05:57 (3 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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