पंचांग 27 सितंबर 2051

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 सितंबर 2051 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:26
चंद्रोदय00:42 (28 सित॰)
चंद्रास्त13:06
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1973 · विक्रम (चैत्रादि) 2108
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 18:24 तक, फिर कृष्ण नवमी 17:58 (28 सित॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 01:58 (28 सित॰) तक, फिर पुनर्वसु 02:24 (29 सित॰) तक
योग
वरीयान 01:47 (28 सित॰) तक, फिर परिघ 00:29 (29 सित॰) तक
करण
बालव 06:51 तक, फिर कौलव 18:24 तक, फिर तैतिल 06:06 (28 सित॰) तक, फिर गर 17:58 (28 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:49परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:25 – 13:55
  • यमगंड07:54 – 09:24
  • गुलिक काल10:55 – 12:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:24 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:55
  • शुभ(शुभ)10:55 – 12:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:25 – 13:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:26
  • चर(सामान्य)15:26 – 16:56
  • लाभ(शुभ)16:56 – 18:26

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:26 – 19:56
  • शुभ(शुभ)19:56 – 21:26
  • अमृत(शुभ)21:26 – 22:55
  • चर(सामान्य)22:55 – 00:25 (28 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:25 (28 सित॰) – 01:55 (28 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (28 सित॰) – 03:25 (28 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:25 (28 सित॰) – 04:54 (28 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (28 सित॰) – 06:24 (28 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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