पंचांग 23 अक्टूबर 2051
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 अक्टूबर 2051 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय21:36
चंद्रास्त09:59
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1973 · विक्रम (चैत्रादि) 2108
- संवत्सर:
- प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- वृषभ 22:27 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 11:04 तक, फिर कृष्ण पंचमी 08:45 (24 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 11:18 तक, फिर मृगशीर्ष 09:45 (24 अक्टू॰) तक
- योग
- वरीयान 13:35 तक, फिर परिघ 10:36 (24 अक्टू॰) तक
- करण
- बालव 11:04 तक, फिर कौलव 21:49 तक, फिर तैतिल 08:45 (24 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल07:57 – 09:24
- यमगंड10:51 – 12:18
- गुलिक काल13:45 – 15:12
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:30 – 07:57
- काल(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:45
- चर(सामान्य)13:45 – 15:12
- लाभ(शुभ)15:12 – 16:39
- अमृत(शुभ)16:39 – 18:06
रात
- चर(सामान्य)18:06 – 19:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:39 – 21:12
- काल(वर्जित (परंपरा))21:12 – 22:45
- लाभ(शुभ)22:45 – 00:18 (24 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:18 (24 अक्टू॰) – 01:51 (24 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:51 (24 अक्टू॰) – 03:25 (24 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:25 (24 अक्टू॰) – 04:58 (24 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:58 (24 अक्टू॰) – 06:31 (24 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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