पंचांग 30 अक्टूबर 2051

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 अक्टूबर 2051 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय03:46 (31 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:24
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1973 · विक्रम (चैत्रादि) 2108
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
सिंह 21:56 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 10:10 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 12:30 (31 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 15:15 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 18:07 (31 अक्टू॰) तक
योग
इन्द्र 05:27 (31 अक्टू॰) तक, फिर वैधृति 06:21 (1 नव॰) तक
करण
बालव 10:10 तक, फिर कौलव 23:17 तक, फिर तैतिल 12:30 (31 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल07:59 – 09:25
  • यमगंड10:51 – 12:18
  • गुलिक काल13:44 – 15:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:33 – 07:59
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:59 – 09:25
  • शुभ(शुभ)09:25 – 10:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
  • चर(सामान्य)13:44 – 15:10
  • लाभ(शुभ)15:10 – 16:36
  • अमृत(शुभ)16:36 – 18:02

रात

  • चर(सामान्य)18:02 – 19:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:36 – 21:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:10 – 22:44
  • लाभ(शुभ)22:44 – 00:18 (31 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:18 (31 अक्टू॰) – 01:52 (31 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)01:52 (31 अक्टू॰) – 03:26 (31 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)03:26 (31 अक्टू॰) – 04:59 (31 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)04:59 (31 अक्टू॰) – 06:33 (31 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें