पंचांग 21 जून 2052

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 जून 2052 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय01:49 (22 जून)
चंद्रास्त13:41
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1974 · विक्रम (चैत्रादि) 2109
संवत्सर:
अंगिरा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मीन 03:57 (22 जून) तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण नवमी 18:13 तक, फिर कृष्ण दशमी 15:54 (22 जून) तक
नक्षत्र
रेवती 03:57 (22 जून) तक, फिर अश्विनी 02:11 (23 जून) तक
योग
सौभाग्य 06:40 तक, फिर शोभन 03:59 (22 जून) तक, फिर अतिगण्ड 00:51 (23 जून) तक
करण
तैतिल 07:10 तक, फिर गर 18:13 तक, फिर वणिज 05:07 (22 जून) तक, फिर विष्टि 15:54 (22 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03
  • राहु काल10:57 – 12:36
  • यमगंड15:55 – 17:34
  • गुलिक काल07:38 – 09:17

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)05:59 – 07:38
  • लाभ(शुभ)07:38 – 09:17
  • अमृत(शुभ)09:17 – 10:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:36
  • शुभ(शुभ)12:36 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:55 – 17:34
  • चर(सामान्य)17:34 – 19:13

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:13 – 20:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:34 – 21:55
  • लाभ(शुभ)21:55 – 23:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:36 (22 जून)
  • शुभ(शुभ)00:36 (22 जून) – 01:57 (22 जून)
  • अमृत(शुभ)01:57 (22 जून) – 03:18 (22 जून)
  • चर(सामान्य)03:18 (22 जून) – 04:38 (22 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:38 (22 जून) – 05:59 (22 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें