पंचांग 30 नवंबर 2052
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 नवंबर 2052 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:50
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय13:15
चंद्रास्त01:32 (1 दिस॰)
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1974 · विक्रम (चैत्रादि) 2109
- संवत्सर:
- अंगिरा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कुंभ 00:18 (1 दिस॰) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल नवमी 05:31 (1 दिस॰) तक, फिर शुक्ल दशमी 04:19 (2 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 06:17 (1 दिस॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 05:43 (2 दिस॰) तक
- योग
- हर्षण 10:46 तक, फिर वज्र 09:10 (1 दिस॰) तक
- करण
- बालव 17:48 तक, फिर कौलव 05:31 (1 दिस॰) तक, फिर तैतिल 17:01 (1 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:45
- राहु काल09:36 – 11:00
- यमगंड13:46 – 15:09
- गुलिक काल06:50 – 08:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:50 – 08:13
- शुभ(शुभ)08:13 – 09:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:36 – 11:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:23
- चर(सामान्य)12:23 – 13:46
- लाभ(शुभ)13:46 – 15:09
- अमृत(शुभ)15:09 – 16:33
- काल(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:56
रात
- लाभ(शुभ)17:56 – 19:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:33 – 21:10
- शुभ(शुभ)21:10 – 22:46
- अमृत(शुभ)22:46 – 00:23 (1 दिस॰)
- चर(सामान्य)00:23 (1 दिस॰) – 02:00 (1 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:00 (1 दिस॰) – 03:37 (1 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:37 (1 दिस॰) – 05:13 (1 दिस॰)
- लाभ(शुभ)05:13 (1 दिस॰) – 06:50 (1 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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