पंचांग 10 दिसंबर 2052
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 दिसंबर 2052 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:56
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय22:25
चंद्रास्त10:32
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1974 · विक्रम (चैत्रादि) 2109
- संवत्सर:
- अंगिरा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कर्क 05:45 (11 दिस॰) तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 20:32 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 19:08 (11 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 06:58 तक, फिर आश्लेषा 05:45 (11 दिस॰) तक, फिर मघा 05:20 (12 दिस॰) तक
- योग
- इन्द्र 16:17 तक, फिर वैधृति 13:48 (11 दिस॰) तक
- करण
- कौलव 09:33 तक, फिर तैतिल 20:32 तक, फिर गर 07:44 (11 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
- राहु काल15:13 – 16:35
- यमगंड09:41 – 11:04
- गुलिक काल12:27 – 13:50
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:56 – 08:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:18 – 09:41
- चर(सामान्य)09:41 – 11:04
- लाभ(शुभ)11:04 – 12:27
- अमृत(शुभ)12:27 – 13:50
- काल(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:13
- शुभ(शुभ)15:13 – 16:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:35 – 17:58
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:58 – 19:36
- लाभ(शुभ)19:36 – 21:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:13 – 22:50
- शुभ(शुभ)22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:27 (11 दिस॰) – 02:05 (11 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:05 (11 दिस॰) – 03:42 (11 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:42 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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