पंचांग 15 दिसंबर 2052

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 दिसंबर 2052 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय02:48 (16 दिस॰)
चंद्रास्त14:05
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1974 · विक्रम (चैत्रादि) 2109
संवत्सर:
अंगिरा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कन्या 21:57 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 21:33 तक, फिर कृष्ण एकादशी 23:40 (16 दिस॰) तक
नक्षत्र
हस्त 08:49 तक, फिर चित्रा 11:12 (16 दिस॰) तक
योग
सौभाग्य 10:10 तक, फिर शोभन 10:31 (16 दिस॰) तक
करण
वणिज 08:39 तक, फिर विष्टि 21:33 तक, फिर बव 10:33 (16 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:51
  • राहु काल16:37 – 18:00
  • यमगंड12:29 – 13:52
  • गुलिक काल15:15 – 16:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:59 – 08:21
  • चर(सामान्य)08:21 – 09:44
  • लाभ(शुभ)09:44 – 11:07
  • अमृत(शुभ)11:07 – 12:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:29 – 13:52
  • शुभ(शुभ)13:52 – 15:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:37 – 18:00

रात

  • शुभ(शुभ)18:00 – 19:38
  • अमृत(शुभ)19:38 – 21:15
  • चर(सामान्य)21:15 – 22:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:30 (16 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:30 (16 दिस॰) – 02:07 (16 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:07 (16 दिस॰) – 03:44 (16 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:44 (16 दिस॰) – 05:22 (16 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:22 (16 दिस॰) – 06:59 (16 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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