पंचांग 23 मार्च 2053
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 मार्च 2053 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:36
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय08:47
चंद्रास्त21:47
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1975 · विक्रम (चैत्रादि) 2110
- संवत्सर:
- श्रीमुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 08:15 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 06:11 (24 मार्च) तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:59 (25 मार्च) तक
- नक्षत्र
- भरणी 05:13 (24 मार्च) तक, फिर कृत्तिका 03:44 (25 मार्च) तक
- योग
- वैधृति 19:54 तक, फिर विष्कम्भ 17:00 (24 मार्च) तक
- करण
- गर 08:15 तक, फिर वणिज 19:15 तक, फिर विष्टि 06:11 (24 मार्च) तक, फिर बव 17:06 (24 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05
- राहु काल17:14 – 18:46
- यमगंड12:41 – 14:12
- गुलिक काल15:43 – 17:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:36 – 08:07
- चर(सामान्य)08:07 – 09:38
- लाभ(शुभ)09:38 – 11:09
- अमृत(शुभ)11:09 – 12:41
- काल(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
- शुभ(शुभ)14:12 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:46
रात
- शुभ(शुभ)18:46 – 20:14
- अमृत(शुभ)20:14 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:40 (24 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:40 (24 मार्च) – 02:09 (24 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:09 (24 मार्च) – 03:37 (24 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:37 (24 मार्च) – 05:06 (24 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:06 (24 मार्च) – 06:35 (24 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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