पंचांग 20 फ़रवरी 2054

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 फ़रवरी 2054 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय16:43
चंद्रास्त05:55 (21 फ़र॰)
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1975 · विक्रम (चैत्रादि) 2110
संवत्सर:
श्रीमुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 19:24 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 15:49 (21 फ़र॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 00:23 (21 फ़र॰) तक, फिर आश्लेषा 21:33 (21 फ़र॰) तक
योग
सौभाग्य 22:47 तक, फिर शोभन 18:38 (21 फ़र॰) तक
करण
कौलव 09:09 तक, फिर तैतिल 19:24 तक, फिर गर 05:37 (21 फ़र॰) तक, फिर वणिज 15:49 (21 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल11:21 – 12:48
  • यमगंड15:42 – 17:09
  • गुलिक काल08:26 – 09:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:59 – 08:26
  • लाभ(शुभ)08:26 – 09:53
  • अमृत(शुभ)09:53 – 11:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:48
  • शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:09
  • चर(सामान्य)17:09 – 18:37

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:37 – 20:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:09 – 21:42
  • लाभ(शुभ)21:42 – 23:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (21 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:48 (21 फ़र॰) – 02:20 (21 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:20 (21 फ़र॰) – 03:53 (21 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:53 (21 फ़र॰) – 05:26 (21 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:26 (21 फ़र॰) – 06:58 (21 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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