पंचांग 17 फ़रवरी 2055

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 फ़रवरी 2055 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय00:12 (18 फ़र॰)
चंद्रास्त11:13
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1976 · विक्रम (चैत्रादि) 2111
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 09:39 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 08:12 (18 फ़र॰) तक
नक्षत्र
स्वाती 16:50 तक, फिर विशाखा 16:16 (18 फ़र॰) तक
योग
वृद्धि 20:56 तक, फिर ध्रुव 18:50 (18 फ़र॰) तक
करण
वणिज 09:39 तक, फिर विष्टि 20:50 तक, फिर बव 08:12 (18 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:48 – 14:15
  • यमगंड08:28 – 09:54
  • गुलिक काल11:21 – 12:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:01 – 08:28
  • अमृत(शुभ)08:28 – 09:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:54 – 11:21
  • शुभ(शुभ)11:21 – 12:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
  • चर(सामान्य)15:42 – 17:09
  • लाभ(शुभ)17:09 – 18:35

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:09
  • शुभ(शुभ)20:09 – 21:42
  • अमृत(शुभ)21:42 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:48 (18 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (18 फ़र॰) – 02:21 (18 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (18 फ़र॰) – 03:54 (18 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)03:54 (18 फ़र॰) – 05:27 (18 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:27 (18 फ़र॰) – 07:00 (18 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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