पंचांग 3 दिसंबर 2056

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 दिसंबर 2056 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:51
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय03:49 (4 दिस॰)
चंद्रास्त15:06
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1978 · विक्रम (चैत्रादि) 2113
संवत्सर:
धाता (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कन्या 19:01 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 18:05 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 14:58 (4 दिस॰) तक
नक्षत्र
हस्त 08:03 तक, फिर चित्रा 05:52 (4 दिस॰) तक, फिर स्वाती 03:15 (5 दिस॰) तक
योग
आयुष्मान 07:32 तक, फिर सौभाग्य 03:58 (4 दिस॰) तक, फिर शोभन 00:01 (5 दिस॰) तक
करण
बव 07:27 तक, फिर बालव 18:05 तक, फिर कौलव 04:35 (4 दिस॰) तक, फिर तैतिल 14:58 (4 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
  • राहु काल16:33 – 17:56
  • यमगंड12:24 – 13:47
  • गुलिक काल15:10 – 16:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:51 – 08:15
  • चर(सामान्य)08:15 – 09:38
  • लाभ(शुभ)09:38 – 11:01
  • अमृत(शुभ)11:01 – 12:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:47
  • शुभ(शुभ)13:47 – 15:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:56

रात

  • शुभ(शुभ)17:56 – 19:33
  • अमृत(शुभ)19:33 – 21:10
  • चर(सामान्य)21:10 – 22:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:47 – 00:24 (4 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:24 (4 दिस॰) – 02:01 (4 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:01 (4 दिस॰) – 03:38 (4 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:38 (4 दिस॰) – 05:15 (4 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:15 (4 दिस॰) – 06:52 (4 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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