पंचांग 29 नवंबर 2057
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
29 नवंबर 2057 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:49
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय09:34
चंद्रास्त20:52
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1979 · विक्रम (चैत्रादि) 2114
- संवत्सर:
- ईश्वर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- धनु 03:59 (30 नव॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 09:45 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 06:41 (30 नव॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:58 (1 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 22:33 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 20:25 (30 नव॰) तक
- योग
- शूल 07:27 तक, फिर गण्ड 03:41 (30 नव॰) तक, फिर वृद्धि 00:12 (1 दिस॰) तक
- करण
- गर 09:45 तक, फिर वणिज 20:10 तक, फिर विष्टि 06:41 (30 नव॰) तक, फिर बव 17:16 (30 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:45
- राहु काल13:46 – 15:09
- यमगंड06:49 – 08:12
- गुलिक काल09:36 – 10:59
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:49 – 08:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:12 – 09:36
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:36 – 10:59
- चर(सामान्य)10:59 – 12:22
- लाभ(शुभ)12:22 – 13:46
- अमृत(शुभ)13:46 – 15:09
- काल(वर्जित (परंपरा))15:09 – 16:32
- शुभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- अमृत(शुभ)17:56 – 19:33
- चर(सामान्य)19:33 – 21:09
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:46
- काल(वर्जित (परंपरा))22:46 – 00:23 (30 नव॰)
- लाभ(शुभ)00:23 (30 नव॰) – 01:59 (30 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:59 (30 नव॰) – 03:36 (30 नव॰)
- शुभ(शुभ)03:36 (30 नव॰) – 05:13 (30 नव॰)
- अमृत(शुभ)05:13 (30 नव॰) – 06:49 (30 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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