पंचांग 28 सितंबर 2058
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 सितंबर 2058 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:25
चंद्रोदय15:52
चंद्रास्त03:22 (29 सित॰)
- मास:
- अधिक आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1980 · विक्रम (चैत्रादि) 2115
- संवत्सर:
- बहुधान्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 19:21 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 16:16 (29 सित॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 19:51 तक, फिर धनिष्ठा 17:32 (29 सित॰) तक
- योग
- सुकर्मा 18:14 तक, फिर धृति 14:35 (29 सित॰) तक
- करण
- वणिज 08:49 तक, फिर विष्टि 19:21 तक, फिर बव 05:49 (29 सित॰) तक, फिर बालव 16:16 (29 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:49
- राहु काल09:24 – 10:54
- यमगंड13:55 – 15:25
- गुलिक काल06:24 – 07:54
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
- शुभ(शुभ)07:54 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:25
- चर(सामान्य)12:25 – 13:55
- लाभ(शुभ)13:55 – 15:25
- अमृत(शुभ)15:25 – 16:55
- काल(वर्जित (परंपरा))16:55 – 18:25
रात
- लाभ(शुभ)18:25 – 19:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:55 – 21:25
- शुभ(शुभ)21:25 – 22:55
- अमृत(शुभ)22:55 – 00:25 (29 सित॰)
- चर(सामान्य)00:25 (29 सित॰) – 01:55 (29 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:55 (29 सित॰) – 03:24 (29 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (29 सित॰) – 04:54 (29 सित॰)
- लाभ(शुभ)04:54 (29 सित॰) – 06:24 (29 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5
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