पंचांग 21 मई 2059

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 मई 2059 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:03
चंद्रोदय14:04
चंद्रास्त02:41 (22 मई)
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
सिंह 20:42 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 07:24 तक, फिर शुक्ल दशमी 09:37 (22 मई) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 14:00 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 16:43 (22 मई) तक
योग
हर्षण 22:05 तक, फिर वज्र 22:44 (22 मई) तक
करण
कौलव 07:24 तक, फिर तैतिल 20:32 तक, फिर गर 09:37 (22 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:09
  • यमगंड07:37 – 09:15
  • गुलिक काल10:53 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)05:59 – 07:37
  • अमृत(शुभ)07:37 – 09:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:15 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:47
  • चर(सामान्य)15:47 – 17:25
  • लाभ(शुभ)17:25 – 19:03

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:03 – 20:25
  • शुभ(शुभ)20:25 – 21:47
  • अमृत(शुभ)21:47 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:31 (22 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (22 मई) – 01:53 (22 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (22 मई) – 03:15 (22 मई)
  • लाभ(शुभ)03:15 (22 मई) – 04:37 (22 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:37 (22 मई) – 05:58 (22 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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