पंचांग 18 अगस्त 2059

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 अगस्त 2059 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:59
चंद्रोदय14:30
चंद्रास्त01:41 (19 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृश्चिक 02:41 (19 अग॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:07 (19 अग॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 03:36 (20 अग॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:41 (19 अग॰) तक, फिर मूल 02:00 (20 अग॰) तक
योग
वैधृति 00:34 (19 अग॰) तक, फिर विष्कम्भ 22:26 (19 अग॰) तक
करण
तैतिल 17:33 तक, फिर गर 05:07 (19 अग॰) तक, फिर वणिज 16:28 (19 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
  • राहु काल07:52 – 09:27
  • यमगंड11:03 – 12:38
  • गुलिक काल14:13 – 15:49

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:17 – 07:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • शुभ(शुभ)09:27 – 11:03
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:13
  • चर(सामान्य)14:13 – 15:49
  • लाभ(शुभ)15:49 – 17:24
  • अमृत(शुभ)17:24 – 18:59

रात

  • चर(सामान्य)18:59 – 20:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:24 – 21:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:49 – 23:13
  • लाभ(शुभ)23:13 – 00:38 (19 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:38 (19 अग॰) – 02:03 (19 अग॰)
  • शुभ(शुभ)02:03 (19 अग॰) – 03:27 (19 अग॰)
  • अमृत(शुभ)03:27 (19 अग॰) – 04:52 (19 अग॰)
  • चर(सामान्य)04:52 (19 अग॰) – 06:17 (19 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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