पंचांग 22 जनवरी 2060

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 जनवरी 2060 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:22
चंद्रोदय22:24
चंद्रास्त10:17
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
सिंह 13:52 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 06:08 (23 जन॰) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 08:48 (24 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 07:10 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 10:05 (23 जन॰) तक
योग
शोभन 12:35 तक, फिर अतिगण्ड 13:25 (23 जन॰) तक
करण
कौलव 16:52 तक, फिर तैतिल 06:08 (23 जन॰) तक, फिर गर 19:27 (23 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:08
  • राहु काल14:10 – 15:34
  • यमगंड07:09 – 08:33
  • गुलिक काल09:57 – 11:21

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)07:09 – 08:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:21
  • चर(सामान्य)11:21 – 12:45
  • लाभ(शुभ)12:45 – 14:10
  • अमृत(शुभ)14:10 – 15:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:34 – 16:58
  • शुभ(शुभ)16:58 – 18:22

रात

  • अमृत(शुभ)18:22 – 19:58
  • चर(सामान्य)19:58 – 21:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:34 – 23:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:45 (23 जन॰)
  • लाभ(शुभ)00:45 (23 जन॰) – 02:21 (23 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:21 (23 जन॰) – 03:57 (23 जन॰)
  • शुभ(शुभ)03:57 (23 जन॰) – 05:33 (23 जन॰)
  • अमृत(शुभ)05:33 (23 जन॰) – 07:09 (23 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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