पंचांग 4 फ़रवरी 2060
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 फ़रवरी 2060 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय08:52
चंद्रास्त20:49
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1981 · विक्रम (चैत्रादि) 2116
- संवत्सर:
- प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- कुंभ 06:38 (5 फ़र॰) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 01:53 (5 फ़र॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 22:56 (5 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 14:22 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 12:05 (5 फ़र॰) तक
- योग
- परिघ 18:32 तक, फिर शिव 14:52 (5 फ़र॰) तक
- करण
- तैतिल 15:24 तक, फिर गर 01:53 (5 फ़र॰) तक, फिर वणिज 12:23 (5 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:13
- यमगंड08:32 – 09:57
- गुलिक काल11:23 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:07 – 08:32
- अमृत(शुभ)08:32 – 09:57
- काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:23
- शुभ(शुभ)11:23 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:39
- चर(सामान्य)15:39 – 17:04
- लाभ(शुभ)17:04 – 18:29
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:29 – 20:04
- शुभ(शुभ)20:04 – 21:38
- अमृत(शुभ)21:38 – 23:13
- चर(सामान्य)23:13 – 00:48 (5 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (5 फ़र॰) – 02:22 (5 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (5 फ़र॰) – 03:57 (5 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:57 (5 फ़र॰) – 05:32 (5 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:32 (5 फ़र॰) – 07:06 (5 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें