पंचांग 5 अक्टूबर 2060

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 अक्टूबर 2060 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय15:17
चंद्रास्त02:42 (6 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 13:46 तक, फिर शुक्ल एकादशी 12:12 (6 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
श्रवण 22:50 तक, फिर धनिष्ठा 21:41 (6 अक्टू॰) तक
योग
सुकर्मा 08:50 तक, फिर धृति 06:35 (6 अक्टू॰) तक
करण
गर 13:46 तक, फिर वणिज 01:04 (6 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 12:12 (6 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
  • राहु काल15:21 – 16:50
  • यमगंड09:24 – 10:53
  • गुलिक काल12:22 – 13:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:53
  • लाभ(शुभ)10:53 – 12:22
  • अमृत(शुभ)12:22 – 13:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:21
  • शुभ(शुभ)15:21 – 16:50
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:50 – 18:19

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:19 – 19:50
  • लाभ(शुभ)19:50 – 21:21
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:21 – 22:51
  • शुभ(शुभ)22:51 – 00:22 (6 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:22 (6 अक्टू॰) – 01:53 (6 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:53 (6 अक्टू॰) – 03:24 (6 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (6 अक्टू॰) – 04:55 (6 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (6 अक्टू॰) – 06:26 (6 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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